मायावती बोलीं- सड़कों पर उतरने से नहीं, वोट की ताकत और संविधान के दायरे में रहकर करें अपने हक की लड़ाई

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश के दलितों और उपेक्षित वर्गों से सीधे संविधान के दायरे में रहकर अपने हक की लड़ाई लड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर उतरने और हिंसक आंदोलनों से किसी को न्याय नहीं मिलने वाला, बल्कि इससे समाज के कमजोर वर्गों की परेशानियां और बढ़ेंगी। मायावती ने जिला मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज और हरदोई में हुए हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा।

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीम राव अंबेडकर ने अपनी काबिलियत और सूझ-बूझ से करोड़ों दलितों और उपेक्षित वर्गों को वोट की ताकत समेत अनेक संवैधानिक और कानूनी अधिकार दिलाए थे। उन्होंने कहा, बाबा साहब अपने लोगों को सलाह देते रहे कि किसी भी मामले में अपने ऊपर होने वाले जुल्म और जाति के खिलाफ लड़ाई कानून के दायरे में रहकर लड़नी है। अगर निचली अदालत में इंसाफ नहीं मिलता तो सर्वोच्च अदालत तक जाना चाहिए। यह सब व्यवस्था भारतीय संविधान में मौजूद है।

कुछ पार्टियां अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकती हैं

मायावती ने आरोप लगाया कि कई संगठन और पार्टियां अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए दलित और उपेक्षित वर्गों के लोगों को गुमराह कर सड़कों पर उतारती हैं और हिंसा, हंगामा या सड़क जाम जैसे हालात पैदा करवाती हैं। उन्होंने कहा, फिर उनके मुखिया घटना स्थल पर पहुंचकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। इससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिलने वाला, बल्कि उनकी मुसीबत और परेशानी और बढ़ेगी।

सत्ता की मास्टर चाबी खुद अपने हाथ में लें

बसपा अध्यक्ष ने बाबा साहब के उस संदेश को दोहराया कि केंद्र और राज्यों की राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी दलितों और उपेक्षित वर्गों को खुद अपने हाथ में लेनी होगी। उन्होंने कहा, यही लाख दुखों की एक दवा है और इसके लिए बसपा लगातार तत्पर और प्रयासरत है। हमें इस मार्ग से बिल्कुल नहीं भटकना है। मायावती ने अपने संबोधन में कांशीराम को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बाबा साहब के बताए रास्ते पर चलते हुए ही बसपा का गठन किया था।

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