
तमिलनाडु में प्रस्तावित परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है। पूर्व मंत्री और डीएमके विधायक थंगम थेन्नारसु ने सोमवार को कहा कि अगर राजनीतिक कारणों से इस परियोजना को रद्द किया गया तो राज्य को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि कई उद्योग तमिलनाडु से पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश की ओर जा सकते हैं।
दो रनवे की संभावनाओं के बाद चुना गया था परंदूर
थंगम थेन्नारसु ने कहा कि परंदूर को एयरपोर्ट के लिए चुनने से पहले सभी संभावनाओं का अध्ययन किया गया था। इसमें दो रनवे बनाने की संभावना भी शामिल थी। उन्होंने कहा कि सभी पहलुओं की जांच के बाद ही इस जगह का चयन किया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों की जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी, उन्हें मुआवजा दिया जा चुका है। भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार, अधिग्रहित जमीन का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए, जिसके लिए उसे लिया गया है।
प्रोजेक्ट रद्द होने पर उद्योगों के पलायन की चेतावनी
डीएमके विधायक ने कहा कि परंदूर एयरपोर्ट के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है और इसे रद्द करने से राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहले ही होसुर एयरपोर्ट का नुकसान हो चुका है और अब कई उद्योग आंध्र प्रदेश की ओर जा सकते हैं।
विधानसभा में DMK ने किया वॉकआउट
इस मुद्दे को लेकर तमिलनाडु विधानसभा में भी हंगामा हुआ। परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पर बोलने का मौका नहीं मिलने के विरोध में डीएमके विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।
CM विजय ने प्रोजेक्ट छोड़ने का किया था ऐलान
इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने घोषणा की थी कि उनकी सरकार परंदूर में नए एयरपोर्ट के निर्माण की दिशा में उठाए गए कदमों को आगे नहीं बढ़ाएगी। उन्होंने कहा था कि इस परियोजना से कृषि भूमि प्रभावित होगी और किसानों व स्थानीय लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था कि चेन्नई का मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट सालाना करीब 3 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है, लेकिन शहर की बढ़ती जरूरतों, औद्योगिक विकास और कार्गो परिवहन को देखते हुए नए एयरपोर्ट की आवश्यकता है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि नया एयरपोर्ट ऐसी जगह बनाया जाना चाहिए जहां कृषि भूमि और रिहायशी इलाकों पर कम से कम असर पड़े।
किसानों के समर्थन में सीएम विजय का बयान
सीएम विजय ने बताया कि उन्होंने 20 जनवरी 2025 को एगनापुरम और आसपास के गांवों का दौरा कर परंदूर एयरपोर्ट का विरोध कर रहे लोगों की समस्याएं सुनी थीं। उन्होंने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और वह अपनी जमीन बचाने के लिए आंदोलन कर रहे लोगों के साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि वह औद्योगिक विकास और एयरपोर्ट की जरूरत के पक्ष में हैं, लेकिन यह परियोजना परंदूर में नहीं होनी चाहिए। सरकार को ऐसी वैकल्पिक जगह तलाशनी चाहिए जहां लोगों की आजीविका और कृषि भूमि को कम नुकसान पहुंचे।









