
तमिलनाडु की राजनीति से एक बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने गुरुवार को विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से पुरजोर अपील की गई है कि वह मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य भाषा के तौर पर तमिल को मान्यता दे और न्यायिक कार्रवाई में इसके इस्तेमाल के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया तय करे। सदन में बोलते हुए सीएम विजय ने याद दिलाया कि इससे पहले 6 दिसंबर 2006 को भी तमिलनाडु विधानसभा ने एकमत से ऐसा ही प्रस्ताव पास किया था, जिसे केंद्र सरकार के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया था, हालांकि तब इस पर सहमति नहीं बन पाई थी।
नया प्रस्ताव संविधान की संघीय (फेडरल) और बहुभाषी प्रकृति का हवाला देते हुए पेश किया गया है। इसमें तमिलनाडु ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट, 1956 का जिक्र करते हुए बताया गया कि तमिल राज्य की आधिकारिक भाषा है और इसके प्रावधान निचली अदालतों तथा ट्रिब्यूनल में इसके इस्तेमाल को कानूनी मान्यता देते हैं। इसके अलावा, प्रस्ताव में संविधान के आर्टिकल 348(2) और ऑफिशियल लैंग्वेजेज एक्ट, 1963 के सेक्शन 7 का हवाला दिया गया है, जो राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से राज्यपाल को हाई कोर्ट की कार्यवाही में अंग्रेजी के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषा के इस्तेमाल की मंजूरी देने का अधिकार प्रदान करता है।
सरकार की मांग है कि केंद्र सरकार इस मामले में त्वरित कदम उठाए ताकि मद्रास हाई कोर्ट में तमिल भाषा में याचिकाएं, दस्तावेज दाखिल किए जा सकें और मौखिक बहस भी इसी भाषा में हो सके। इसके साथ ही, कोर्ट के सभी फैसले, आदेश और डिक्री तमिल में उपलब्ध कराने, तथा जजों, वकीलों व कोर्ट स्टाफ के लिए विशेष ट्रांसलेशन और ट्रेनिंग की सुविधा मुहैया कराने की बात भी कही गई है। इस प्रस्ताव के पारित होने से राज्य के लोगों को अपनी मातृभाषा में न्याय मिलने की राह आसान होने की उम्मीद है।









