
मेरठ में डॉ. रोहिणी घावरी ने बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। उन्होंने वाल्मीकि समाज के अधिकारों, राजनीतिक हिस्सेदारी और आरक्षण के मुद्दे पर सीधा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दो टुक अंदाज में कहा कि वाल्मीकि समाज को अब सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्हें शासन और सत्ता में सीधी हिस्सेदारी चाहिए।
डॉ. रोहिणी घावरी ने समाज की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को सामने रखते हुए इच्छा जताई कि वाल्मीकि समाज से भी प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना चाहिए। उन्होंने वाल्मीकि समाज के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण की पुरजोर मांग उठाई। हालांकि, उन्होंने व्यावहारिक दृष्टिकोण रखते हुए यह भी कहा कि “हमारी मांग 30 प्रतिशत की होगी, लेकिन कम से कम 10 प्रतिशत आरक्षण मिलने की उम्मीद जरूर है।”
उत्तर प्रदेश की राजनीति में वाल्मीकि समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उप-वर्गीकरण की मांग को लेकर नई बहस छिड़ गई है। रोहिणी घावरी के इस कड़े रुख से आने वाले दिनों में प्रमुख राजनीतिक दलों पर अपने टिकट बंटवारे और संगठनात्मक ढांचे में समाज को बड़ी हिस्सेदारी देने का दबाव बढ़ सकता है।









