विधायक उमेश कुमार ने Podcast With Brajesh Misra में किया बड़ा खुलासा! सुनाए दोस्ती-दुश्मनी और फरारी के दिनों के किस्से

नई दिल्ली। भारत समाचार के एडिटर-इन-चीफ ब्रजेश मिश्रा के पॉडकास्ट में खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने कई बड़े खुलासे किए। उन्होंने पत्रकारिता से राजनीति तक के अपने सफर, मुख्यमंत्रियों से लड़ाई, जेल और फरारी के दिनों और भविष्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर खुलकर बात की।

पुष्कर धामी से 26 साल की दोस्ती, दगा देकर भी CM बनना चाहूंगा

उमेश कुमार ने साफ कहा कि उनकी पुष्कर सिंह धामी से 26 साल की दोस्ती है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह धामी को रिप्लेस करना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “मेरे कोई बड़े राजनीतिक दल का सदस्य नहीं हूं कि मैं किसी को दगा देकर या उस दल को… जिस दिन लड़ूंगा मैं उस दिन अपने दल का हूं। मेरे दल की अगर कभी सरकार बनेगी तो मैं मुख्यमंत्री बनना चाहूंगा। मैंने यह नहीं कहा कि मैं धामी जी की टांग खींच के या उन्हें हटा के या दगा करके रिप्लेस करूं। रिप्लेस करने की टीस नहीं है। इच्छाओं की बात है।” उन्होंने कहा कि धामी सफल मुख्यमंत्री हैं और अगर उनके भाग्य में एक और टेन्योर है तो मिलेगा।

हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत से नहीं करता प्रणाम

उमेश कुमार ने खुलकर कहा कि हरीश रावत उनके दुश्मन हैं। उन्होंने बताया, “एक दिन डाम कोठी में मैं निकल रहा था और हरीश रावत जी आ रहे थे। मैंने प्रणाम किया तो उन्होंने नजरअंदाज कर दिया। बुजुर्ग हैं, संस्कारी लोग हैं, इसलिए प्रणाम किया, लेकिन उन्होंने नहीं लिया। उस दिन कसम खा ली कि आखिरी बार किया था।” वहीं त्रिवेंद्र सिंह रावत के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें भी प्रणाम नहीं करते। लेकिन निशंक जी के बारे में उन्होंने कहा कि वो नमस्कार लेते हैं और बात भी करते हैं।

पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर

उमेश कुमार ने बताया कि वह पहले पत्रकार थे और उन्होंने ईटीवी और समाचार प्लस जैसे चैनल चलाए। उन्होंने कहा, “मैं पत्रकार था, छाती ठोक कर पत्रकार था। हमने कभी मालिकाना व्यवहार नहीं किया।” उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर 2021 को हरिद्वार क्रॉस करते समय उनके मोबाइल पर एक व्हाट्सएप आया, जिसमें एक बाहुबली नेता ने एक पत्रकार को अपमानित किया था।

उन्होंने उसका विरोध किया, जिसका वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद 10,000 लोग उनके घर पहुंचे और खानपुर से चुनाव लड़ने का दबाव डाला। उन्होंने कहा, “10 नवंबर को मैं वहां गया और 14 फरवरी को चुनाव हो गया। तीन महीने में मैं चुनाव जीता।”

2011 में गाय की पूंछ में फोन बांधकर बचाई जान

उमेश कुमार ने अपनी फरारी के दिनों का किस्सा सुनाते हुए बताया, “2011 जून में मेरे खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया। दिल्ली में मुझे घेरा गया, गाड़ी में टक्कर मारी गई। मैंने डिवाइडर तोड़ा, ब्रेक फेल हो गए। फिर मैं सोनीपत पहुंचा, फोन को पॉलिथीन में डालकर गाय की पूंछ में बांध दिया। गाड़ी स्टार्ट की और वापस दिल्ली आ गया। रातभर पुलिस मुझे ढूंढती रही। फिर बरेली, शाहजहांपुर, रूपड़िया, बहराइच होते हुए नेपाल बॉर्डर पार किया। काठमांडू से भूटान, फिर थाईलैंड। वहां 14 दिन रुकता, कंबोडिया जाता, फिर वापस आ जाता।”

150 से ज्यादा मुकदमे झेले, एक भी स्टैंड नहीं कर पाया

उन्होंने बताया कि उन पर एक समय 150 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे, लेकिन अब सिर्फ छह बचे हैं। उन्होंने कहा, “सारे हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से क्वैश हो गए। मेरा ट्रायल किसी भी मुकदमे में नहीं चला। कोई मुकदमा मेरे खिलाफ स्टैंड ही नहीं कर पाया। कोई धारा ऐसी नहीं है जिस धारा का मुकदमा मुझ पर न लगाया हो। बंगाल तक ने मेरे खिलाफ सात मुकदमे दर्ज किए।”

पहले 54 करोड़, अब 77 करोड़ की संपत्ति

जब उनसे पूछा गया कि इतनी संपत्ति कहां से आई, तो उन्होंने कहा, “काम-धंधे हैं, रोजगार हैं, एग्रीकल्चर और हॉर्टिकल्चर का काम है। मेरी ईडी हो चुकी है, इनकम टैक्स हो चुका है। सारी जांच एजेंसियां जांच कर चुकी हैं।” उन्होंने कहा कि अगर वो भ्रष्ट होते तो राजमहलों में रहते, लेकिन उनके पास पांच जोड़ा कपड़े और सामान्य घर है।

त्रिवेंद्र सरकार में 220 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग

उमेश कुमार ने आरोप लगाया कि त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में 220 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग हुई। उन्होंने कहा, “सोशल म्यूचुअल बेनिफिट करके एक एनबीएफसी है। मुख्यमंत्री का एक सलाहकार औद्योगिक होता था के.एस. पंवार। वो उस कंपनी के निदेशक हैं। 2017 में त्रिवेंद्र रावत आए तो उन्होंने सबसे पहली नियुक्ति औद्योगिक सलाहकार की के.एस. पवार की। जिस दिन नियुक्ति की, उस दिन से लेकर जिस दिन तक त्रिवेंद्र रावत मुख्यमंत्री रहे, उस कंपनी में 220 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग हुई।”

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