
वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की आधुनिक सेमी हाई स्पीड ट्रेनों में से एक है। इसका इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम इसे पारंपरिक डीजल ट्रेन की तरह डीजल ईंधन के बिना चलने में मदद करता है। आंकड़ों के मुताबिक, वंदे भारत एक किलोमीटर की यात्रा के लिए औसतन 20 यूनिट बिजली की खपत करती है।
अगर रेलवे द्वारा प्रति यूनिट लगभग ₹6.50 का भुगतान किया जाता है, तो बिजली की लागत करीब ₹130 प्रति किलोमीटर आती है। हालांकि, यह केवल बिजली की अनुमानित लागत है। इसमें ट्रेन संचालन से जुड़े अन्य खर्च शामिल नहीं होते।
एक किलोमीटर चलने में कितनी बिजली खर्च होती है?
इसका हिसाब काफी सीधा है।
- बिजली की खपत: 20 यूनिट प्रति किलोमीटर
- अनुमानित बिजली दर: ₹6.50 प्रति यूनिट
- लागत: 20 × ₹6.50 = ₹130 प्रति किलोमीटर
इस हिसाब से वंदे भारत को एक किलोमीटर चलाने के लिए आवश्यक बिजली की लागत लगभग ₹130 आती है।
यह सिर्फ संचालन ऊर्जा का अनुमान है। इसमें स्टाफ, रखरखाव, ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टेशन संचालन और रेलवे से जुड़े दूसरे खर्च शामिल नहीं हैं।
ब्रेक लगाते समय बिजली कैसे बनाती है वंदे भारत?
वंदे भारत में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक रीजेनरेटिव ब्रेकिंग है। जब ट्रेन की रफ्तार कम होती है तो इसकी ट्रैक्शन मोटर इस तरह काम कर सकती है कि ट्रेन की कुछ काइनेटिक एनर्जी को दोबारा विद्युत ऊर्जा में बदला जा सके।
पारंपरिक ब्रेकिंग में ऊर्जा का बड़ा हिस्सा गर्मी के रूप में बर्बाद हो जाता है। इसके बजाय रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम ब्रेक लगाने के दौरान ऊर्जा का कुछ हिस्सा वापस हासिल कर सकता है और उसे रेलवे के पावर सिस्टम में भेज सकता है।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वंदे भारत गोरखपुर-लखनऊ की एक यात्रा के दौरान रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से लगभग 1,153 यूनिट बिजली बचाती है और वापस हासिल की गई बिजली को ग्रिड में भेजती है।
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग क्यों है जरूरी?
तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेन में काफी मात्रा में काइनेटिक एनर्जी होती है। जब ट्रेन की रफ्तार कम होती है तो उस ऊर्जा का किसी रूप में परिवर्तित होना जरूरी होता है।
पारंपरिक ब्रेकिंग प्रक्रिया में ऊर्जा का बड़ा हिस्सा गर्मी के रूप में बर्बाद हो जाता है। वहीं रीजेनरेटिव ब्रेकिंग ट्रैक्शन सिस्टम को ऊर्जा का कुछ हिस्सा वापस हासिल करके उसे विद्युत शक्ति में बदलने की सुविधा देती है।
वापस हासिल की गई बिजली को रेलवे के इलेक्ट्रिकल नेटवर्क में भेजा जा सकता है। इससे सिस्टम से ली जाने वाली बिजली की मात्रा कम करने में मदद मिलती है।
डीजल ट्रेन से कितनी अलग है वंदे भारत?
ऊर्जा की लागत की तुलना करने पर अंतर स्पष्ट होता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, डीजल से चलने वाली ट्रेन को प्रति किलोमीटर लगभग 3.5 से 4 लीटर डीजल की जरूरत होती है।
अगर डीजल की अनुमानित कीमत ₹100 प्रति लीटर मानी जाए, तो ईंधन का खर्च प्रति किलोमीटर करीब ₹350 से ₹400 होगा।
इसके मुकाबले वंदे भारत के लिए बिजली की अनुमानित लागत लगभग ₹130 प्रति किलोमीटर बताई गई है।
हालांकि, दोनों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये केवल ऊर्जा या ईंधन लागत के अनुमान हैं। ट्रेन के संचालन की कुल लागत इससे अलग होती है।
वंदे भारत को क्या बनाता है ज्यादा ऊर्जा-कुशल?
वंदे भारत की ऊर्जा दक्षता सिर्फ इसके इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन से जुड़ी नहीं है। इसमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग जैसी तकनीक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ट्रेन की रफ्तार बढ़ाते समय बिजली खर्च होती है, जबकि रफ्तार कम करते समय रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम ऊर्जा का कुछ हिस्सा वापस हासिल कर सकता है। आधुनिक ट्रेन डिजाइन और इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम भी इसकी संचालन दक्षता के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
इसलिए ₹130 प्रति किलोमीटर के आंकड़े को विशेष रूप से बिजली की खपत और अनुमानित बिजली दर के आधार पर निकाली गई ऊर्जा लागत के तौर पर समझना चाहिए।
कुल मिलाकर, दिए गए आंकड़ों के अनुसार वंदे भारत की प्रति किलोमीटर अनुमानित बिजली लागत करीब ₹130 है। वहीं रीजेनरेटिव ब्रेकिंग ट्रेन के धीमा होने के दौरान ऊर्जा का कुछ हिस्सा वापस हासिल करने में मदद करती है। इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और आधुनिक ट्रेन तकनीक का यह संयोजन वंदे भारत को पारंपरिक डीजल ट्रेन से अलग बनाता है।









