चंद्रशेखर खुद तय करेंगे उम्मीदवार, विधानसभा टिकट के लिए देना होगा साक्षात्कार

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर इस वक्त की एक बहुत बड़ी और रणनीतिक खबर सामने आ रही है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने राज्य में किसी भी बड़े गठबंधन का हिस्सा बनने के बजाय अकेले ही विधानसभा चुनाव लड़ने के मजबूत संकेत दे दिए हैं। पार्टी ने चुनावी रण में उतरने की अपनी तैयारियों को पूरी तरह धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में टिकट वितरण को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए पार्टी ने एक अनोखा तरीका अपनाया है, जिसके तहत उम्मीदवारों को सिंबल देने से पहले उनका कड़ा इंटरव्यू (साक्षात्कार) लिया जा रहा है।

आजाद समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील चित्तौड़ ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि नगीना सीट से सांसद और पार्टी के शीर्ष नेता चंद्रशेखर आज़ाद आज (13 जून) से लेकर 18 जून तक प्रांतीय राजधानी लखनऊ में ही डेरा डालेंगे। इस छह दिवसीय प्रवास के दौरान चंद्रशेखर खुद पार्टी कार्यालय में बैठकर टिकट के दावेदारों का आमने-सामने (वन-टू-वन) साक्षात्कार लेंगे। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान संबंधित क्षेत्रों के मंडलीय अध्यक्ष भी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे, ताकि जमीनी पकड़ की सही समीक्षा की जा सके।

मंडलवार इंटरव्यू का पूरा शेड्यूल आया सामने
पार्टी आलाकमान ने उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों के लिए एक विस्तृत साक्षात्कार कार्यक्रम तैयार किया है, जिसकी शुरुआत आज से हो चुकी है:

13 जून (आज): सहारनपुर, मेरठ और मुरादाबाद मंडल की सभी विधानसभा सीटों के दावेदारों का इंटरव्यू लिया जा रहा है। पश्चिमी यूपी के इन जिलों से भारी संख्या में दावेदार लखनऊ पहुंचे हैं।

14 जून: बरेली, आगरा और अलीगढ़ मंडल के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों के उम्मीदवारों की बारी होगी।

15 जून: राजधानी लखनऊ, अयोध्या और देवीपाटन (गोंडा) मंडल के दावेदारों का परीक्षण चंद्रशेखर खुद करेंगे।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसके बाद के दिनों में पूर्वांचल और बुंदेलखंड के अन्य मंडलों का इंटरव्यू शेड्यूल भी पूरा किया जाएगा। चंद्रशेखर आज़ाद का यह कदम दिखाता है कि वे चुनाव में केवल जीतने वाले और वैचारिक रूप से मजबूत चेहरों को ही मैदान में उतारना चाहते हैं। आजाद समाज पार्टी के इस बड़े फैसले के बाद सूबे के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले की स्थिति में कई सीटों के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

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