
डेस्क : यूरोप के पोलैंड में राजनीतिक और संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार और राष्ट्रपति कारोल नवरोकी के बीच सत्ता और न्यायपालिका के नियंत्रण को लेकर टकराव खुलकर सामने आ गया है। शुक्रवार को वारसॉ स्थित संवैधानिक न्यायालय के अध्यक्ष बोगदान स्वेंचकोव्स्की को उनके पद से निलंबित किए जाने की घोषणा के बाद विवाद बढ़ गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यायालय की वरिष्ठ जज अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का ने न्यायालय के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को अस्थायी रूप से जिम्मेदारियों से हटाने का आदेश जारी किया। इसके बाद न्यायालय परिसर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर वस्तुएं फेंकीं, जिसके बाद तीन लोगों को हिरासत में लिया गया।
इस घटनाक्रम के बीच पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नवरोकी ने अपना सेनेगल दौरा बीच में ही छोड़ दिया और स्वदेश लौटने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में राष्ट्रपति का देश में रहना जरूरी है।
वहीं, विपक्षी लॉ एंड जस्टिस पार्टी (PiS) के नेताओं ने प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार पर संवैधानिक तख्तापलट करने का आरोप लगाया है। न्यायालय के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से भी इस कार्रवाई को तख्तापलट बताया गया। हालांकि, प्रधानमंत्री टस्क ने सरकार के कदम का बचाव करते हुए इसे देश में कानून का शासन बहाल करने की प्रक्रिया बताया है।
दरअसल, पोलैंड में न्यायपालिका के नियंत्रण को लेकर विवाद काफी समय से चल रहा है। अब न्यायालय के नेतृत्व को लेकर पैदा हुआ नया टकराव देश के राजनीतिक संकट को और गंभीर बना सकता है।









