
नई दिल्ली: महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले की जांच अब एक नए और चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दावा किया है कि इस अवैध सट्टेबाजी से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी ‘Ebix’ के अधिग्रहण में किया गया था। इस मामले में कारोबारी विकास गर्ग का नाम मुख्य रूप से सामने आया है।
क्या है Ebix अधिग्रहण का खेल?
ED के अनुसार, विकास गर्ग ने अपनी कंपनी ‘Eraaya Lifespaces’ के जरिए अगस्त 2024 में अमेरिकी दिवालिया अदालत की प्रक्रिया के माध्यम से Ebix में 97.58% हिस्सेदारी खरीदी थी। यह सौदा लगभग 1,175 करोड़ रुपये में हुआ था। जांच में सामने आया है कि इस अधिग्रहण के लिए इस्तेमाल किए गए 765.77 करोड़ रुपये पूरी तरह से ‘क्राइम की कमाई’ (Proceeds of Crime) थे, जो महादेव सट्टेबाजी ऐप और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म्स जैसे ‘Skyexchange’ से आए थे।
हवाला और निवेश का चक्रव्यूह
अवैध पैसे को वैध बनाने के लिए एक जटिल वित्तीय जाल बुना गया था। इस पैसे को फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCBs), क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (QIPs) और अन्य विदेशी निवेश संरचनाओं के माध्यम से रूट किया गया। ED ने गर्ग, उनके परिवार और संबंधित संस्थाओं की 940.77 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इसमें Ebix में 893.03 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी और करीब 47 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।
मास्टरमाइंड और नेटवर्क
जांच एजेंसी का कहना है कि कोलकाता के एंट्री ऑपरेटर अमित सरावगी ने 525 करोड़ रुपये की फर्जी एंट्रीज के जरिए इस काली कमाई को वैध निवेश का रूप देने में मुख्य भूमिका निभाई थी। पूछताछ के दौरान विकास गर्ग ने यह स्वीकार किया कि उन्हें विदेशी निवेश के अवैध स्रोत की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने इस पैसे को स्वीकार किया।
गौरतलब है कि इस पूरे नेटवर्क का सरगना सौरभ चंद्राकर है, जिसे इस साल ओमान में फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार किया गया था। भारतीय एजेंसियां अब उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में जुटी हैं। यह घोटाला न केवल सट्टेबाजी का है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में भारत के काले धन को घुसाने का एक बड़ा प्रयास है। ED की यह कार्रवाई इस बड़े स्कैम की जड़ें खोदने के लिए एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।









