महाराष्ट्र : शरद पवार की पार्टी की एनडीए में एंट्री के लिए बीजेपी ने रखी बड़ी शर्त, क्या फिर एक होंगे एनसीपी के दोनों गुट?

महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों बेहद रोचक मोड़ पर है। राज्य की सियासत में एक बार फिर शरद पवार की एनसीपी (NCP) के एनडीए (NDA) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इन सबके बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की रणनीति को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसने महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

बीजेपी का ‘मास्टर प्लान’

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने एनसीपी के लिए एक स्पष्ट शर्त रखी है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि यदि एनसीपी को आधिकारिक तौर पर एनडीए का हिस्सा बनाना है, तो सबसे पहले शरद पवार गुट और अजित पवार गुट का एक होना अनिवार्य है। बीजेपी किसी एक गुट को अलग से गठबंधन में लाने के बजाय पूरी एनसीपी को एक मंच पर देखना चाहती है। भाजपा का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह राज्य में स्थिरता और एनसीपी के संगठनात्मक ढांचे के पूर्ण विलय को प्राथमिकता दे रही है।

अजित पवार गुट की उम्मीदें

दूसरी ओर, सत्ताधारी गठबंधन (बीजेपी-शिंदे सेना) का हिस्सा बनी अजित पवार की एनसीपी भी सक्रिय है। पार्टी के अंदर इस बात की मांग जोर पकड़ रही है कि राज्यसभा सांसद पार्थ पवार को आगामी कैबिनेट विस्तार में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जगह मिलनी चाहिए। यह मांग एनसीपी की गठबंधन के भीतर अपनी सौदेबाजी की शक्ति और महत्व को दर्शाती है।

संसदीय गणित और परिसीमन का दबाव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सारी कवायद संसद के आगामी मानसून सत्र के मद्देनजर है। सरकार ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक’ लाने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना और परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करना है। लोकसभा में आठ और राज्यसभा में एक सीट रखने वाली एनसीपी (शरद पवार गुट) का समर्थन या तटस्थ रुख सरकार के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने हालांकि साफ किया है कि कोई भी फैसला ‘इंडी गठबंधन’ (INDIA Alliance) के भीतर चर्चा के बाद ही लिया जाएगा, लेकिन उन्होंने 50 प्रतिशत सीट बढ़ोतरी वाले परिसीमन के विरोध का कोई ठोस कारण नहीं बताया है।

मुलाकातों का बढ़ता सिलसिला

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास पर हुई हालिया बैठक ने इन अटकलों को और हवा दी है। हालांकि, नेताओं का दावा है कि ये मुलाकातें केवल स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों, जैसे सांगली जिले के निर्वाचन क्षेत्र और नगर परिषद से जुड़े अतिक्रमण मामलों पर केंद्रित थीं। इसके अलावा, शरद पवार की उपमुख्यमंत्री के कार्यालय में विधायकों के साथ हुई बैठक को भले ही सुप्रिया सुले ने इत्तेफाक बताया हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे पर्दे के पीछे चल रही बड़ी रणनीतिक हलचल के रूप में देख रहे हैं।

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