
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान को अदालत से एक बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (NCCIA) द्वारा जारी किए गए नोटिस के खिलाफ मोहम्मद रिजवान की ओर से लाहौर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसे गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने खारिज कर दिया है। इस मामले की सुनवाई लाहौर हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस आलिया नीलम की बेंच ने की, जिन्होंने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को जाकर खुद नोटिस का जवाब देना चाहिए।
बता दें, सुनवाई के दौरान रिजवान के वकील काजी उमैर अली ने कोर्ट को बताया कि लॉर्ड्स टेस्ट के बाद उनके मु मुवक्किल को होटल की लॉबी में बुलाया गया था, जहां बिना किसी पूर्व सूचना के पूछताछ की गई और उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया। वकील ने दलील दी कि एजेंसी ने तीन घंटे के भीतर फोन वापस लौटने का आश्वासन दिया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके साथ ही, बचाव पक्ष ने इस पूरी कार्रवाई को एनसीसीआईए के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया और इसमें आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट को शामिल किए जाने की बात उठाई। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों के बाद भी याचिका को खारिज कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक, एनसीसीआईए इस समय मोहम्मद रिजवान और ओपनर इमाम उल हक के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच करा रही है। एजेंसी अगले सप्ताह तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को सौंप देगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पीसीबी यह तय करेगा कि दोनों खिलाड़ियों को इस मामले में राहत दी जाए या उनके खिलाफ कोई कड़ा अनुशासनात्मक एक्शन लिया जाए। यदि जांच में सब कुछ सामान्य पाया जाता है, तो दोनों खिलाड़ियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि हाल ही में पाकिस्तान टीम ने इंग्लैंड का दौरा किया था, जहां उन्हें 0-3 से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में हार के बाद पाकिस्तान ने सात खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर दिया था, जिसमें मोहम्मद रिजवान और इमाम उल हक भी शामिल थे। दोनों खिलाड़ियों को तुरंत स्वदेश वापस भेज दिया गया था, जिसके बाद से राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी द्वारा इस पूरे मामले की जांच की जा रही है।









