
महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक बड़ी और सुकून देने वाली खबर सामने आई है। पुणे के नसरपुर में महज 4 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी करने और उसकी बेरहमी से हत्या करने वाले 65 वर्षीय दोषी भीमराव कांबले को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। सोमवार (29 जून) को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज एसआर सालुंके ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस कृत्य को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) माना और टिप्पणी करते हुए कहा कि इस जघन्य और घिनौनी वारदात के लिए उम्रकैद की सजा काफी नहीं है। कोर्ट के मुताबिक, दोषी को देने के लिए फांसी की सजा भी छोटी है, लेकिन कानून के पास इससे बड़ी सजा देने का प्रावधान नहीं है।
देश का सबसे तेज ट्रायल: 2 महीने के भीतर आया अंतिम फैसला
यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में अब तक की सबसे तेज चलने वाली अदालती कार्यवाहियों में से एक बन गया है। महज दो महीने के भीतर पुलिस की मुस्तैदी और कोर्ट की तत्परता की वजह से न सिर्फ आरोपी को पकड़ा गया, बल्कि उसे सूली पर चढ़ाने तक का फैसला भी सुना दिया गया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बीती 25 जून को ही भीमराव कांबले को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दोषी करार दे दिया था और सजा के ऐलान के लिए 29 जून की तारीख तय की थी। सोमवार को जब कोर्ट में जज फैसला पढ़ रहे थे, तब मासूम बच्ची का परिवार वहां मौजूद था और इंसाफ मिलने की खुशी में पूरे कोर्ट रूम में रो पड़ा।
दिल दहला देने वाली वारदात: सिर कुचलकर गोबर के ढेर में छुपाया था शव
यह दिल दहला देने वाली घटना इसी साल 1 मई को भोर तालुका के नसरपुर में हुई थी। दोपहर के वक्त 4 साल की मासूम अपने घर के बाहर खेल रही थी, तभी 65 साल का भीमराव कांबले वहां पहुंचा। वह बच्ची को बहला-फुसलाकर पास की एक गौशाला में ले गया। वहां उसने मासूम के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। दुष्कर्म के बाद उसने मासूम का सिर भारी पत्थर से कुचलकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी और पहचान छुपाने के लिए शव को गोबर के ढेर के नीचे दबा दिया।
जब काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। शक के आधार पर जब गौशाला की जांच की गई, तो वहां बच्ची का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। पुलिस ने जब इलाके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले, तो उसमें साफ दिख रहा था कि भीमराव कांबले ही बच्ची को अपने साथ लेकर गया था, जिसके बाद उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।
कटघरे में भी नहीं था कोई पछतावा, बोला- ‘मैंने कुछ गलत नहीं किया’
विशेष सरकारी वकील (Special Public Prosecutor) एडवोकेट मिलिंद पवार ने कोर्ट को बताया कि पूरी कानूनी कार्यवाही के दौरान दोषी भीमराव कांबले के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी और उसे अपनी इस घिनौनी करतूत पर कोई पछतावा नहीं था।
25 जून को जब जज ने उसे कटघरे में खड़ा करके पूछा था कि उसने जो किया उसे याद करे और खुद बताए कि उसे क्या सजा मिलनी चाहिए, तो कांबले ने बेहद बेशर्मी से अपनी पूरी वारदात कोर्ट रूम में सुनाई। उसने जज के सामने यहाँ तक कह दिया कि उसके मुताबिक उसने कुछ भी गलत नहीं किया था। उसकी इस बात को सुनकर अदालत ने उसे बीच में ही टोक दिया था। बच्ची के परिवार के वकील शुरुआत से ही इस हैवान के लिए मौत की सजा की मांग कर रहे थे, जिसे कोर्ट ने आखिरकार स्वीकार कर लिया।









