चुनाव में ड्यूटी करने वाले अफसरों पर दायर इस याचिका को इलाहबाद हाईकोर्ट ने किया खारिज, कही यह बड़ी बात?

याचिका में दलील दी गई थी कि निर्वाचन आयोग की गाइडलाइंस के पैरा 40 में ऑनलाइन ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की गई है। फिजिकल ट्रेनिंग होने पर अफसरों के संक्रमित होने का खतरा रहेगा और घर वापस लौटने पर परिवार वाले भी संक्रमित हो सकते हैं। इसी मामले में हाईकोर्ट से दखल दिए जाने की मांग की गई थी।

यूपी विधानसभा चुनाव में ड्यूटी करने वाले पीठासीन अफसरों की फिजिकल ट्रेनिंग कराए जाने के मामले में चुनाव आयोग को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहबाद हाईकोर्ट ने फिजिकल ट्रेनिंग पर पाबंदी लगाकर सिर्फ ऑनलाइन ट्रेनिंग कराए जाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने चुनाव आयोग के जवाब को संतोषजनक मानते हुए कहा कि ट्रेनिंग को लेकर चुनाव आयोग ने पर्याप्त कदम उठाए हैं।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कहा कि ट्रेनिंग को लेकर चुनाव आयोग द्वारा उठाये गए कदम पर्याप्त हैं और चुनाव आयोग ने जो इंतजाम किए हैं वह पूरी तरह संतोषजनक है इसलिए इस मामले में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। दरअसल, चुनाव में ड्यूटी करने वाले पीठासीन अफसरों की फिजिकल ट्रेनिंग कराए जाने के मामले में दायर याचिका पर चुनाव आयोग का जवाब दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट ने अर्जी को खारिज कर दिया।

याचिका में दलील दी गई थी कि निर्वाचन आयोग की गाइडलाइंस के पैरा 40 में ऑनलाइन ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की गई है। फिजिकल ट्रेनिंग होने पर अफसरों के संक्रमित होने का खतरा रहेगा और घर वापस लौटने पर परिवार वाले भी संक्रमित हो सकते हैं। इसी मामले में हाईकोर्ट से दखल दिए जाने की मांग की गई थी जिसपर कोर्ट ने रविवार को छुट्टी के दिन सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा था।

सोमवार को चुनाव आयोग ने अपना जवाब कोर्ट के समक्ष रखा जिससे कोर्ट संतुष्ट रही। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस शेखर कुमार यादव की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग ने ट्रेनिंग को लेकर पुख्ता इंतजाम किए हैं इसलिए कोविड प्रोटोकाल के तहत ही ट्रेनिंग कराई जाएगी साथ ही ट्रेनिंग करने वालों के लिए कोविड टेस्ट और वैक्सीनेशन अनिवार्य होगा।

बता दें कि सामाजिक संस्था दयालबाग शिक्षण संस्थान ने यह याचिका दायर की थी। याचिका में विधानसभा चुनाव में ड्यूटी करने वाले पीठासीन अफसरों को फिजिकल के बजाय सिर्फ ऑनलाइन ट्रेनिंग कराए जाने की मांग की गई थी जिसे इलाहबाद उच्च न्यायलय ने सोमवार को खारिज कर दिया।

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