पीएम आवास में बड़े घोटाले आ रहे सामने, 30 सदस्यीय टीम द्वार बड़े स्तर पर होगी जाँच

सरकार की तरफ से गरीबों को राहत देने के लिए कई तरह की महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जाती हैं। लेकिन इन योजनाओं को लोगो तक पहुंचने में बहुत ही धाधलेगीरी होती है।

बस्तीः सरकार की तरफ से गरीबों को राहत देने के लिए कई तरह की महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जाती हैं। लेकिन इन योजनाओं को लोगो तक पहुंचने में बहुत ही धाधलेगीरी होती है। सरकारी योजनाओं में जनप्रतिनिधियों द्वारा धन उगाही और भ्रष्टाचार की बात कोई नई नही है। अब केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास जैसी महत्वपूर्ण योजना में भ्रष्टाचार के खुलासे होने शुरू हो गए हैं। कई मामले में कार्यवाही के बाद अब प्रशासन द्वारा लगभग 15 हजार आवासों की जाँच कराने की बात कही जा रही है

पीएम आवास के मामले में भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब इसकी जाँच पड़ताल की गई तो पता चला कि शहर में तीन आवास आपत्रो को दिया जा चुका है। इस योजना में क्रिएटिव कंसोर्टियम कंपनी के दो जेई शशि प्रकाश और दिनेश चौधरी द्वारा किये गए भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब लखनऊ के सूडा के निर्देश आदेश पर परियोजना अधिकारी उमा शंकर वर्मा सहित दोनों जेई पर कार्यक्रम अधिकारी अतुल चौहान द्वारा तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया गया तब मामला और भी तूल पकड़ लिया। इस पूरे मामले में दो एफआईआर दर्ज की गई।

पीएम आवास के मामले में कार्यवाही के बाद अब प्रशासन द्वारा लगभग 15 हजार आवासों की जाँच कराने की बात कही जा रही है,जिसमे जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन द्वारा आदेश किया जा चुका है। इस जाँच में 30 सदस्यीय टीम जिला स्तरीय जाँच करेगी जिसकी मॉनिटरिंग एसडीएम द्वारा स्वंम की जाएगी।

ऐसे में अफसरो की क्रयप्रणाली पर सवाल भी उठता है कि जब प्रधानमंत्री आवास में पत्रों के चयन के दौरान तीन सदस्यीय टीम (तहसीलदार, ईओ नगर पालिका/ईओ नगर पंचायत व कंपनी का एक जेई) द्वारा पात्रता का चयन किया जाता है, उसके बाद जिओ टैग किया जाता है तो पात्रता का चैन करने वाले तीन सदस्यीय टीम द्वारा किस प्रकार से जाँच की गई की पत्रों को छोड़ अपात्रों को आवास आवंटित कर दिया गया।

पीएम आवास के लिए सभी जगह जाँच के बाद ही पात्रता तय की जाती है जिसके बाद संबंधित अधिकारियों के टेबल से पत्रों और अपात्रों की फाइल पास होते हुए नोडल के पास जाती है और फिर नोडल अधिकारी द्वारा आवास की संतुत की जाती है और शासन को भेज दिया जाता है, वहीँ आपत्रो या पत्रों की फाइल की जाँच नोडल द्वारा भी नहीं कराई जाती है, अगर जाँच करायी जाती तो शायद प्रधानमंत्री आवास योजना में चल रही धांधली का खुलासा पहले ही हो जाता।

क्रिएटिव कंसोर्टियम द्वारा बस्ती व अन्य 11 जिले में भी काम किया जा रहा है। पीएम आवास में हुई धांधली को लेकर बड़ा सवाल उठता है और अगर इसकी जाँच जाँच एजेंसी से कराई जाए तो बड़े पैमाने पर आपत्रो का खुलासा होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना में रुधौली नगर पंचायत अध्यक्ष धीरसेन निषाद की माने तो उनके यहाँ आवास के नाम पर जमकर वसूली की गई है। इसके एवज में उनको प्रचार प्रसार भी किया गया कि आप आवास के लिए पैसे मत दे अगर आवास आप के नाम आया है तो जरूर मिलेगा, लेकिन इसके बाद भी वसूली की गई है।

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