DUSU Elections: दिल्ली यूनिवर्सिटी की सियासी नर्सरी में किसका दबदबा? 10 साल के चुनावी सफर में बदलते समीकरण

दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ और साउथ कैंपस की सड़कों पर सितंबर की ठंडी हवाओं के साथ पर्चे उड़ने शुरू होते हैं तो समझ लीजिए कि देश की राजधानी का सियासी पारा चढ़ने लगा है। डीयू छात्रसंघ यानी डूसू चुनाव सिर्फ कॉलेजों के कुछ नुमाइंदे चुनने का जरिया नहीं हैं। यह देश की मुख्यधारा की राजनीति की वो नर्सरी हैं, जहां से कई बड़े राष्ट्रीय नेता अपनी सियासी जमीन तैयार करते हैं।

पिछले एक दशक के डूसू चुनावों पर नजर डालें तो मुकाबला मुख्य रूप से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के बीच रहा है। AISA और SFI जैसे वामपंथी छात्र संगठन भी चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं।

10 साल के चुनावी सफर में ABVP का दबदबा

2014 से 2019 के बीच डूसू अध्यक्ष पद पर ABVP ने 2014, 2015, 2016, 2018 और 2019 में जीत दर्ज की, जबकि 2017 में NSUI के रॉकी तुसीद अध्यक्ष चुने गए। 2023 में ABVP के तुषार डेडा, 2024 में NSUI के रौनक खत्री और 2025 में ABVP के आर्यन मान अध्यक्ष बने। यानी उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड में अध्यक्ष पद पर दोनों संगठनों के बीच मुकाबला बना रहा, लेकिन ABVP की जीत की संख्या अधिक रही।

2025 के चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद जीते, जबकि NSUI ने उपाध्यक्ष पद अपने नाम किया।

अध्यक्ष पद के प्रमुख चेहरे

पिछले एक दशक में डूसू अध्यक्ष पद पर चुने गए प्रमुख नाम इस तरह रहे—

2014: मोहित नागर — ABVP
2015: सतेंदर अवाना — ABVP
2016: अमित तंवर — ABVP
2017: रॉकी तुसीद — NSUI
2018: अंकिव बैसोया — ABVP
2019: अक्षित दहिया — ABVP
2020-21: कोविड-19 महामारी के कारण चुनाव नहीं हुए
2022: चुनाव नहीं हुए
2023: तुषार डेडा — ABVP
2024: रौनक खत्री — NSUI
2025: आर्यन मान — ABVP

इन चुनावों के आधिकारिक रिकॉर्ड दिल्ली यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं।

2024 में NSUI की वापसी, 2025 में फिर ABVP

2024 का चुनाव डूसू की राजनीति में अहम रहा, जब NSUI ने सात साल के अंतराल के बाद अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। रौनक खत्री ने अध्यक्ष पद हासिल किया, जबकि ABVP ने उपाध्यक्ष और सचिव पद जीते और NSUI ने संयुक्त सचिव पद भी अपने नाम किया।

इसके एक साल बाद 2025 में ABVP ने अध्यक्ष समेत तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। आर्यन मान अध्यक्ष चुने गए और NSUI के राहुल झंसला उपाध्यक्ष बने।

वोटर टर्नआउट और बदलता छात्रों का मिजाज

डूसू चुनाव में मतदान प्रतिशत भी लगातार चर्चा का विषय रहा है। 2023 में मतदान करीब 42 प्रतिशत रहा। 2024 में यह घटकर 35.20 प्रतिशत हुआ, जबकि 2025 में 39.45 प्रतिशत तक पहुंचा। 2026 में उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक मतदान प्रतिशत करीब 40.46 प्रतिशत रहा।

यानी मतदान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। चुनावी मुद्दों में कैंपस सुविधाओं, परिवहन, फीस और हॉस्टल जैसी छात्र समस्याएं लगातार चर्चा में रहती हैं। 2025 के चुनाव में भी छात्रों के बीच कैंपस सुविधाओं और किफायती परिवहन जैसे मुद्दे सामने आए थे।

महिला उम्मीदवारों की भागीदारी

डूसू चुनावों में महिला उम्मीदवारों की भागीदारी भी चर्चा का विषय रही है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों पर महिला प्रतिनिधित्व पुरुष उम्मीदवारों की तुलना में सीमित रहा है। वहीं अलग-अलग चुनावों में महिला उम्मीदवारों ने सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पदों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

2025 में ABVP की दीपिका झा संयुक्त सचिव चुनी गईं।

पर्चों से सोशल मीडिया तक पहुंचा डूसू चुनाव

डूसू चुनाव का प्रचार भी समय के साथ बदला है। पर्चों, पोस्टरों और कैंपस रैलियों के साथ अब सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम रील्स और डिजिटल कैंपेन चुनावी प्रचार का अहम हिस्सा बन चुके हैं। 2025 और 2026 के चुनावों में भी सोशल मीडिया कैंपेन और छात्रों से जुड़े स्थानीय मुद्दे चुनावी चर्चा में रहे।

पिछले एक दशक का चुनावी सफर बताता है कि डूसू में ABVP और NSUI के बीच मुकाबला लगातार प्रमुख रहा है, जबकि वामपंथी संगठनों की भी चुनावी मौजूदगी बनी हुई है। अब सवाल यह है कि आने वाले वर्षों में डूसू की राजनीति किन छात्र मुद्दों और नए राजनीतिक समीकरणों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है।

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