
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सिविल कोर्ट के पास से अवैध अतिक्रमण हटाए जाने के बाद वकीलों के बीच लाठियां बांटने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सोमवार को हुई इस मामले की अहम सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा, “क्या आप इस तरह की हरकतें करके प्रशासन को सही काम करने से रोक लेंगे?” कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए वकीलों के इस आचरण पर आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्रवाई शुरू करने पर विचार करने के संकेत दिए हैं।
लखनऊ
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) May 26, 2026
➡वकीलों के बीच लाठियां बांटने का वीडियो
➡हाईकोर्ट ने वायरल वीडियो का लिया संज्ञान
➡‘क्या प्रशासन को सही काम करने से रोक लेंगे’
➡‘आपराधिक अवमानना की कार्रवाई पर करेंगे विचार’
➡सिविल कोर्ट के पास से अवैध कब्जे हटाने का मामला
➡मामले में सोमवार को HC लखनऊ बेंच में हुई… pic.twitter.com/NXDggRkSt3
बिना चिन्हांकन के कार्रवाई का वकीलों ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान वकीलों की तरफ से दलील दी गई कि नगर निगम ने अतिक्रमण की सीमा को पहले से चिन्हित किए बिना ही यह तोड़फोड़ की कार्रवाई की है। वकीलों के पक्ष ने कोर्ट को बताया कि इस कार्रवाई की जद में एक फोटोकॉपी की दुकान भी आ गई जिसे पूरी तरह तोड़ दिया गया। वकीलों का कहना था कि इस दुकान का किराया सीधे जिला कोर्ट प्रशासन को जाता था, इसके बावजूद नगर निगम ने इसे भी ध्वस्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा- हमें घटना की पूरी जानकारी है
वकीलों की इस दलील पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत को मौके पर हुई पूरी घटना और उसकी हकीकत की विस्तृत जानकारी है। कोर्ट ने साफ किया कि वह फोटोकॉपी की दुकान जानबूझकर नहीं, बल्कि अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई के दौरान दुर्घटनावश (Accidentally) टूट गई थी। इसके साथ ही अदालत ने मानवीय पक्ष को देखते हुए यह भी जानकारी दी कि पीड़ित दुकानदार को दूसरी दुकान आवंटित कर दी गई है। हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद अब कोर्ट परिसर के आसपास कानून व्यवस्था और अतिक्रमण विरोधी अभियान को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।









