आज ही के दिन 17 साल पहले आई सबसे भयावह सुनामी ने छोटे कर दिए दिन और बदल दिया दुनिया का नक्शा…

आज से ठीक 17 साल पहले रविवार, 26 दिसंबर का दिन इतिहास के पन्नों में काले दिन के रूप में दर्ज हो गया। इस रात से एक दिन पहले पूरी दुनिया क्रिसमस के जश्न में डूबी थी। वीकेंड पर क्रिसमस और फिर नए साल का जश्न मनाने के लिए काफी संख्या में टूरिस्ट भारतीय समुद्री किनारों पर जुटे थे। ज्यादातर जगहों पर रविवार को भी क्रिसमस का धमाकेदार जश्न होना था, लेकिन अगली सुबह इतनी भयावह होगी किसी को अंदाजा भी न था। भारतीय समयानुसार सुबह 6:28 बजे खूबसूरत समुद्री किनारों ने विकराल रूप धारण कर लिया।

लोग अपने घरों में होटलों में क्रिसमस का जश्न मनाकर चैन की नींद सो रहे थे कि समुद्र ने एक नया रूप धारण कर लिया, अचानक समुद्र में 30 मीट ऊंची लहरें उठनें लगी। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले समुद्र ने विकराल रूप धारण कर लिया। सुनामी की विशाल लहरों ने भारत समेत हिंद महासागर किनारे के 14 देशों में कई किलोमीटर दूर तक तबाही फैला दी थी। सीधे शब्दों में समझा जाए तो तटीय इलाकों में समुद्र कई किलोमीटर अंदर तक पांव पसार चुका था। कुछ पल में ही बड़े-बड़े पुल, घर, इमारतें, गाड़ियां, लोग, जानवर और पेड़ सब समुंद्र की इन लहरों में तिनकों की तरह तैरने लगे थे।

26 दिसंबर 2004 इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में लगभग 9.0 की तीव्रता के भूकंप से पूरा हिंद महासागर कांप उठा, जिसमें 2.5 लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी जान खो दी। जिसमें भारत के करीब 16,279 लोग मारे गए या लापता हो गए थे। यह आपदा इतनी भयावह थी कि मृतकों के शव कई दिनों तक बरामद किए जाते रहे। अब भी बहुत से लोग लापता हैं, जिनका उस आपदा के बाद से कुछ पता नहीं है। 17 साल पहले आज ही के दिन समुद्र के रास्ते भीषण तबाही के रूप में आई सुनामी के जख्म अब भी हरे हैं। सुनामी प्रभावित एरिया के लोग आज भी उस हादसे को याद कर कांप उठते हैं। तबसे 26 दिसंबर की इस तारीख को प्राकृतिक आपदा सुनामी के लिए भी जाना जाता है।

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