
नोएडा: आधुनिकता की अंधी दौड़, महंगी सुख-सुविधाओं की चाहत और बिना कमाए लग्जरी लाइफ जीने की ललक युवाओं को तेजी से अपराध के दलदल में धकेल रही है। उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा से एक ऐसा ही चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जिसने अभिभावकों और पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 से मई 2026 तक महज दो साल के भीतर 18 से 20 वर्ष की उम्र के कुल 217 युवाओं को विभिन्न आपराधिक वारदातों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार किए गए 60 प्रतिशत से ज्यादा आरोपियों ने जुर्म कबूल करते हुए जो वजहें बताई हैं, वे बेहद हैरान करने वाली हैं। इन लड़कों ने बताया कि वे कोई काम नहीं करते थे, लेकिन दोस्तों के बीच स्टेटस मेंटेन करने, आईफोन खरीदने, बुलेट बाइक की सवारी करने और ब्रांडेड कपड़े-जूते पहनने के लिए उन्होंने शार्टकट का रास्ता चुना। गिरफ्तार किए गए 217 आरोपियों में से सबसे ज्यादा 142 युवाओं को चोरी के मामले में, 48 को चेन स्नैचिंग करते हुए और 27 युवकों को गांजा समेत अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में पकड़ा गया है।
केस स्टडीज: पब, पार्टी और महंगे जूतों का शौक
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सूरजपुर पुलिस द्वारा पकड़े गए 18 वर्षीय सूरज ने एक महिला से 3 लाख रुपये की चेन सिर्फ इसलिए लूटी क्योंकि उसे आईफोन और बुलेट बाइक खरीदनी थी। वहीं, जैतपुर से तांबे का तार चोरी करने वाले 19 साल के दीपेश ने बताया कि उसने ब्रांडेड जूते खरीदने के लिए चोरी की थी। बीटा दो पुलिस की गिरफ्त में आए 20 वर्षीय रोहित ने बताया कि उसके बेरोजगार होने के बावजूद दोस्तों के पास महंगी बाइकें थीं, इसलिए उनके बीच अपना रुतबा बनाए रखने के लिए वह स्नैचिंग गिरोह में शामिल हो गया। हद तो तब हो गई जब उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से नोएडा आए 20 साल के उत्तम को सूरजपुर पुलिस ने पकड़ा; उसने कबूला कि वह अपनी गर्लफ्रेंड को जेब खर्च देने, उसे पब ले जाने और महंगी पार्टियां करने के लिए चोरी और गांजा तस्करी का धंधा करने लगा था।
अभिभावकों के लिए पुलिस की बड़ी चेतावनी
इस गंभीर ट्रेंड को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने माता-पिता और अभिभावकों के लिए एक जरूरी एडवायजरी जारी की है। पुलिस का कहना है कि जब बच्चों की कमाई का कोई जरिया न हो और इसके बावजूद वे अचानक महंगे सामान, मोबाइल या बाइक घर लाने लगें, तो अभिभावकों को तत्काल उनसे पैसों के स्रोत के बारे में पूछना चाहिए। बच्चों की संगति और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी है, वरना निगरानी के अभाव में युवा शार्टकट के चक्कर में शातिर अपराधियों के चंगुल में फंसकर अपना भविष्य जेल की सलाखों के पीछे बर्बाद कर रहे हैं।









