हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत डुबोने पर भड़का ईरान, विदेश मंत्री बोले – अमेरिका को अपने कदम पर पछताना पड़ेगा

उन्होंने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में किया गया और एक ही टॉरपीडो से जहाज को समुद्र की गहराई में भेज दिया गया।

हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से डुबोने की घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान के विदेश मंत्री सेयद अब्बास अराघची ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि अमेरिका को इस कदम पर पछताना पड़ेगा।

ईरान के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका ने समुद्र में एक गंभीर अपराध किया है। उन्होंने कहा कि ईरान का फ्रिगेट Dena, जो भारतीय नौसेना का मेहमान था और जिसमें लगभग 130 नाविक सवार थे, उसे अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने एक खतरनाक मिसाल कायम की है और आने वाले समय में उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

यह बयान उस समय आया जब अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की कि अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से डुबो दिया। उन्होंने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में किया गया और एक ही टॉरपीडो से जहाज को समुद्र की गहराई में भेज दिया गया।

अमेरिकी सेना के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने इस कार्रवाई को अमेरिका की वैश्विक सैन्य क्षमता का बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी ने टॉरपीडो से किसी दुश्मन युद्धपोत को डुबोया है। उनके अनुसार यह दिखाता है कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी अपने दुश्मनों को खोजकर निशाना बना सकता है।

इस घटना के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजरायल इस्लामिक गणराज्य की सत्ता को गिराने की कोशिश करते हैं तो ईरान इजरायल के डिमोना परमाणु केंद्र को निशाना बना सकता है।

इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” के तहत मिसाइल और ड्रोन हमलों की उन्नीसवीं लहर शुरू की है। आईआरजीसी के अनुसार यह हमला अमेरिका और इजरायल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया है।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार इन हमलों में अमेरिका और इजरायल के सात से अधिक उन्नत रडार सिस्टम को नष्ट कर दिया गया है। ईरान का दावा है कि इन हमलों से दोनों देशों की निगरानी प्रणाली को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

हिंद महासागर में हुए इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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