
अयोध्या: राम मंदिर में रामधन (चढ़ावा) लूट मामले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे इसमें बेहद चौंकाने वाले मोड़ सामने आ रहे हैं। इस महाघोटाले के आरोपियों की जो लिस्ट सामने आई है, उनमें से कई ऐसे छोटे मुलाजिम हैं जिनकी जमीनी हकीकत देखकर हर कोई हैरान है। इस मामले के एक प्रमुख आरोपी रामशंकर मिश्रा के परिवार ने अब मीडिया के सामने आकर एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है, जिसने पूरी जांच पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिग ब्रेकिंग। अयोध्या। इन्वेस्टिगेशन। जिसके घर में खिड़की ढंकने को ढंग का पर्दा नहीं। टूटा दरवाजा हो घर पर। दीवार पर प्लास्टर तक नहीं। खाने कमाने का कोई साधन नहीं। गरीबी घर के हर कोने और चेहरों पर दिख रही हो उनके ऊपर करोड़ों के रामधन लूट के आरोप हैं। मासिक तनख्वाह पर घर पालने… pic.twitter.com/AdjeGJJz9D
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) July 4, 2026
गरीबी से जूझता परिवार और करोड़ों की लूट का आरोप
जिस रामशंकर मिश्रा पर करोड़ों रुपये के रामधन पर डाका डालने का आरोप लगा है, उसके पैतृक घर की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां करती हैं। घर की दीवारों पर प्लास्टर तक नहीं है, खिड़कियों को ढंकने के लिए ढंग का पर्दा नहीं है और दरवाजा भी टूटा हुआ है। गरीबी घर के हर कोने और घरवालों के चेहरों पर साफ नजर आती है। कमाने-खाने का कोई पक्का साधन नहीं है।
इस बदहाली के बीच आरोपी रामशंकर मिश्रा की भाभी साधना मिश्रा ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा:
“रामशंकर पिछले करीब 6 साल से राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती का काम कर रहा था। इतनी बड़ी जिम्मेदारी के बदले उसे ट्रस्ट या संबंधित एजेंसी से हर महीने महज 16 हजार रुपये वेतन मिलता था। वह अयोध्या में ही एक अलग किराए का कमरा लेकर रहता था। हमें तो इस पूरे मामले की भनक भी महज एक महीने पहले ही लगी है।”
“चोरी बड़े लोगों ने की, छोटे मुलाजिमों को फंसाया गया”
साधना मिश्रा ने सीधे तौर पर मंदिर प्रबंधन और बड़े अधिकारियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि असल चोरी बड़े रसूखदार लोगों ने की है, लेकिन खुद को बचाने के लिए 16 हजार की मासिक तनख्वाह पर काम करने वाले छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। परिवार का सवाल है कि जो व्यक्ति सच में करोड़ों की डकैती में शामिल होगा, क्या उसका परिवार इस कदर फटेहाली और गुरबत की जिंदगी जिएगा?
इस दावे के बाद अब राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही एजेंसियों पर भी दबाव बढ़ गया है। क्या वाकई सुरक्षा और काउंटिंग में लगे इन छोटे कर्मचारियों ने इस बड़ी सेंधमारी को अंजाम दिया, या फिर पर्दे के पीछे कोई ऐसा बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जो छोटे प्यादों को आगे कर खुद सुरक्षित बच निकला है?









