
नई दिल्ली : भारत के सिविल एविएशन रेगुलेटर, DGCA ने देश की सबसे बड़ी डोमेस्टिक एयरलाइन इंडिगो के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। DGCA ने कार्गो लीकेज से जुड़ी एक घटना को लेकर इंडिगो को एक फॉर्मल वॉर्निंग लेटर जारी किया है। मामला एक प्लेन की लैंडिंग के बाद बैगेज बैग्स के लीकेज से जुड़ा है, जिसके बाद रेगुलेटर ने जांच शुरू की।
जाने क्या है पूरा मामला ?
बता दे कि यह घटना जनवरी 2026 की है, जब इंडिगो की एक फ्लाइट के लैंड करने के बाद जमीन पर कार्गो लीक का पता चला था। इस रिसाव में खतरनाक सामान था। इस घटना के बाद, DGCA ने इंडिगो की दिल्ली स्थित इंजीनियरिंग स्टोर फैसिलिटी का एक स्पेशल ऑडिट और इंस्पेक्शन किया। ऑडिट में पाया गया कि एयरलाइन ने अपने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन नहीं किया था। यह लापरवाही ‘एयरक्राफ्ट (ट्रांसपोर्ट ऑफ डेंजरस गुड्स) रूल्स, 2026’ के नियमों का सीधा उल्लंघन थी।
DGCA के सख्त निर्देश
स्टॉक मार्केट में एक रेगुलेटरी फाइलिंग में, इंडिगो की पेरेंट कंपनी ‘इंटरग्लोब एविएशन’ ने कन्फर्म किया है कि उसे DGCA से यह वॉर्निंग लेटर 8 जुलाई, 2026 को मिला है। एविएशन रेगुलेटर ने इंडिगो को जल्द से जल्द ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) जमा करने का आदेश दिया है। इस रिपोर्ट में, एयरलाइन को यह बताना होगा कि उसने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधार के उपाय किए हैं। इसके अलावा, इंडिगो को अपने ट्रेनिंग प्रोग्राम का रिव्यू करने और खतरनाक सामान को संभालने की प्रैक्टिकल एक्सरसाइज शामिल करने के लिए भी कहा गया है।
जानकारी देने में देरी पर कंपनी की सफाई
SEBI के नियमों के मुताबिक, कंपनियों को ऐसी ज़रूरी घटनाओं की जानकारी तुरंत शेयर मार्केट को देनी होती है। लेकिन, इंडिगो ने यह जानकारी शेयर करने में थोड़ी देर कर दी। कंपनी सेक्रेटरी और चीफ कंप्लायंस ऑफिसर नीरजा शर्मा की साइन की हुई फाइलिंग में कहा गया है कि देरी जानबूझकर नहीं की गई, बल्कि कंपनी के अंदर इंटरनल कम्युनिकेशन की कमी की वजह से हुई।
DGCA ने अभी कोई जुर्माना नहीं लगाया
वही इंडिगो ने साफ किया है कि इस वॉर्निंग लेटर की वजह से एयरलाइन पर कोई फाइनेंशियल पेनल्टी, ऑपरेशनल बैन नहीं लगाया गया है। इसलिए, इसका कंपनी के ऑपरेशन, फाइनेंशियल स्थिति या रोज़ाना के कामों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है जब इंटरग्लोब एविएशन ने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के लिए ₹2,536 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस बताया है, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹3,068 करोड़ के नेट प्रॉफिट से काफी कम है।









