
उत्तर प्रदेश के चर्चित औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में शुमार ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के पूर्व महाप्रबंधक (GM) रविंद्र तोंगड़ और उनकी पत्नी कुशल सिंह समेत 14 लोगों पर जमीन और करोड़ों रुपये की हेराफेरी का गंभीर मामला सामने आया है। अदालत के आदेश के बाद नोएडा के सेक्टर-20 थाने में इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे के बाद से स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है।
क्या है पूरा मामला ?
शिकायतकर्ता कंपनी गायत्री हॉस्पिटैलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड (अधिकृत प्रतिनिधि अवि सिंह) के अनुसार, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कंपनी को 72 हजार वर्गमीटर का प्लॉट (GH-11) आवंटित किया गया था, जिसकी लीज डीड फरवरी 2011 में हुई थी। वर्ष 2013 में परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए इसका कुछ हिस्सा तय हुआ था।
आरोप है कि तत्कालीन जीएम रविंद्र तोंगड़ ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस बड़े भूखंड में से 20 हजार वर्गमीटर और 14 हजार वर्गमीटर जमीन अलग-अलग कंपनियों (जैसे ‘इंटाईसमेन्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड’) के नाम सब-लीज करा दी। इस पूरी प्रक्रिया में दस्तावेजों के साथ कथित तौर पर हेराफेरी की गई और बिना निर्धारित रकम का भुगतान किए जमीन के अधिकार दूसरे लोगों को सौंप दिए गए। शिकायत में करीब ₹5 करोड़ रुपये और अन्य बकाया रकम के गबन का भी दावा किया गया है।
सिंडिकेट और रसूख के चर्चे
चर्चा है कि अपने कार्यकाल (2007 से 2012 के बीच) के दौरान रविंद्र तोंगड़ का नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में काफ़ी दबदबा रहा था। जानकारों का कहना है कि उस दौर में इस तरह के कई मामलों में बड़े नाम पर्दे के पीछे रहे, लेकिन हाल ही में बेहिसाब संपत्ति और टिकट की दावेदारी के बीच उपजे विवादों ने इस पुराने राज से पर्दा उठा दिया है।
राजनीतिक कनेक्शन से गर्माई सियासत
इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे का राजनीतिक पहलू भी बेहद अहम माना जा रहा है। नामजद आरोपी बनाई गईं कुशल सिंह (रविंद्र तोंगड़ की पत्नी) आगामी राजनीतिक समीकरणों के तहत दादरी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट की दावेदारी कर रही हैं। चुनाव से ठीक पहले इस तरह का बड़ा कानूनी शिकंजा कसने से विपक्षी दलों को भी बड़ा मुद्दा मिल गया है।
पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
मामले में नामजद अन्य आरोपियों में कुणाल भल्ला, सतीश गर्ग, हिमांशु गोयल, सुरेंद्र सिंह वर्मा, नवीन चौधरी समेत कई अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी द्वारा प्राधिकरण की फाइलों, बैलेंस शीट और सब-लीज डीड की गहनता से जांच की जा रही है।









