सरकारी परीक्षाओं में नकल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करता है-HC

कोर्ट ने कहा परीक्षाओं में नकल करने के कृत्यों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, क्योंकि उनके प्रभाव किसी व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करते हैं।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकारी नौकरियों में नकल कराने वाले आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की! हाई कोर्ट ने  कहा कि सरकारी परीक्षाओं में नकल करना योग्यता और समान अवसरों के सिद्धांतों को कमजोर करता है। इस प्रकार, ऐसे कृत्यों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। क्योंकि उनके प्रभाव किसी व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करते हैं।

न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने अमित कुमार को जमानत देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की, जिस पर इस साल फरवरी में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान किसी अन्य उम्मीदवार का प्रतिरूपण करने का आरोप है।

आदेश में क्या कहा गया?

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “सरकारी परीक्षाओं में नकल करना योग्यता और समान अवसरों के सिद्धांतों को कमजोर करता है, जो सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा देने और समाज में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थे। यह उन लोगों का पक्ष लेकर असमानताओं को कायम रखता है, जो धोखाधड़ी की गतिविधियों के लिए भुगतान कर सकते हैं, जबकि उन लोगों को नुकसान पहुंचाता है, जो सफल होने के लिए अपनी कड़ी मेहनत और योग्यता पर भरोसा करते हैं। इस प्रकार, परीक्षाओं में नकल करने के कृत्यों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, क्योंकि उनके प्रभाव किसी व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करते हैं।”

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