
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी और शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने पार्टी के संस्थापक नेताओं और उसे सत्ता तक पहुंचाने वाले वरिष्ठ नेताओं को भुला दिया है। राउत ने कहा कि जिस नेता ने बीजेपी को राजनीतिक ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, उसी लालकृष्ण आडवाणी को पिछले 12 साल से राजनीतिक रूप से किनारे कर दिया गया।
शिवसेना (UBT) के संसद संजय रवाउत ने बीजेपी के वरिस्ट नेता लालकृष्ण आडवाणी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और
संजय राउत ने राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या रथयात्रा में आडवाणी की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि अगर लालकृष्ण आडवाणी नहीं होते तो राम मंदिर आंदोलन भी इस मुकाम तक नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि अयोध्या रथयात्रा और कारसेवा आंदोलन को आगे बढ़ाने में आडवाणी का महत्वपूर्ण योगदान था। राउत के मुताबिक, बीजेपी को दिल्ली की सत्ता तक पहुंचाने का रास्ता आडवाणी की रथयात्रा से तैयार हुआ था।
‘आडवाणी को वेयरहाउस में डाल दिया’
बीजेपी नेतृत्व पर हमला बोलते हुए संजय राउत ने कहा कि सत्ता हासिल करने के बाद पार्टी ने लालकृष्ण आडवाणी को किनारे कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आडवाणी को राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेल दिया गया और उन्हें वेयरहाउस में डालने जैसा व्यवहार किया गया। राउत ने कहा कि मोदी, शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दौर में बीजेपी के संस्थापक नेता को 12 साल तक वनवास में रखा गया।
उन्होंने आडवाणी के साथ अपने पुराने संबंधों का भी जिक्र किया। राउत ने कहा कि उन्होंने आडवाणी के साथ सरकार और विपक्ष दोनों में काम किया है और उनसे मार्गदर्शन तथा आशीर्वाद प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि आडवाणी का शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के साथ भी अच्छा संबंध था। उद्धव ठाकरे भी उनसे मिलने दिल्ली जाया करते थे।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी उठाए सवाल
अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र करते हुए संजय राउत ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन को पहचान और राजनीतिक स्वरूप देने वाले लालकृष्ण आडवाणी को ही इस दौरान किनारे रखा गया। उन्होंने आडवाणी को लौह पुरुष बताते हुए कहा कि वह किसी के इशारे पर काम करने वाले नेता नहीं थे।
गौरतलब है कि 8 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी के 100वें वर्ष में प्रवेश करने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में जनसंघ और बीजेपी के निर्माण के साथ अयोध्या रथयात्रा में आडवाणी के योगदान को याद किया।
अखिलेश यादव और राम मंदिर पर भी बोले राउत
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से राम मंदिर में दर्शन से पहले माफी मांगने की बात कही थी। राउत ने कहा कि पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने मुलायम सिंह यादव का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब बीजेपी नेता पहले कारसेवकों पर गोली चलवाने के लिए मुलायम सिंह यादव को जिम्मेदार ठहराते थे, तो बाद में उन्हीं मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण सम्मान क्यों दिया गया? राउत ने कहा कि भगवान राम किसी एक राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि सभी के हैं।
किसानों की दिवाली पर भी सरकार को घेरा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से मंत्रियों को किसानों के घर दिवाली मनाने के निर्देश दिए जाने पर भी राउत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल एक दिन किसानों के घर जाकर दिवाली मनाने से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। मंत्रियों को लगातार किसानों के बीच जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि किसानों के घर पर परोसे जाने वाले दिवाली के पकवान किसानों ने बनाए थे या कलेक्टर कार्यालय से भेजे गए थे।
गोकुल विवाद और NCP पर भी दी प्रतिक्रिया
गोकुल सहकारी दुग्ध संघ के विवाद पर संजय राउत ने देवेंद्र फडणवीस पर व्यक्तिगत रुचि के जरिए निदेशकों की नियुक्तियों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव में जीते सतेज पाटिल के पैनल की दो सीटें चुनाव अधिकारी ने दूसरे पैनल को दे दीं। राउत के अनुसार, ऐसा नहीं होता तो सतेज पाटिल के पैनल को 15 सीटें मिलतीं।
वहीं, दिवंगत अजित पवार की पार्टी के संभावित विलय को उन्होंने पार्टी का आंतरिक मामला बताया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कहा कि शरद पवार की मूल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA में शामिल नहीं होगी।









