ओला, उबर, स्विगी, ज़ोमेटो जैसी ऐप आधारित सेवाओं के कर्मचारियों को श्रमिक के रूप में पंजीकृत करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया…

ओला, उबर, स्विगी, ज़ोमेटो जैसी ऐप आधारित सेवाओं के कर्मचारियों को श्रमिक के रूप में पंजीकृत करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया।सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा कि उबर, ओला, स्विगी, जोमैटो कर्मचारियों को कामगार मानते हुए सामाजिक सुरक्षा लाभ दिया जा सकता है या नहीं ?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में ओला, उबर, स्विगी, ज़ोमेटो जैसी ऐप आधारित सेवाओं के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने की मांग भी की गई है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि ड्राइवर नियोक्ता-कर्मचारी समीकरण वाले कामगार हैं और स्वतंत्र ठेकेदार नहीं हैं, क्योंकि भारत में कंपनियां उनका हवाला देती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में उन्हें कामगार के रूप में माना जाता है, मौजूदा कानूनों के तहत भी वह सामाजिक सुरक्षा लाभों के हकदार हैं।

याचिका में केंद्र सरकार को उबर, ओला कैब्स, स्विगी और जोमैटो से जुड़े गिग वर्करों और प्लेटफॉर्म वर्करों को सामाजिक सुरक्षा लाभ देने के लिए निर्देश देने की मांग की गई। याचिका में कहा कि अनुसार 31 दिसंबर तक ऐप आधारित टैक्सी सेवा से जुड़े चालकों को कम से कम 1175 रुपये रोजाना और डिलीवरी बॉयज को 675 रुपए रोजाना रुपये की आमदनी सुनिश्चित की जाए ताकि वो अपना और परिवार का पेट भर सकें।

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