भारत के साथ मिलकर चीन के सामने खड़े हुए ये देश, जानें क्या है प्रोजेक्ट फिजी ?

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक बड़ा भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने क्वॉड...

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक बड़ा भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने क्वॉड (QUAD) गठबंधन के तहत फिजी में एक आधुनिक बंदरगाह विकसित करने पर संयुक्त रूप से सहमति जताई है। इस घोषणा को एक बेहद जरूरी रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वॉड की मौजूदगी को मजबूत करना है।

क्या है फिजी बंदरगाह परियोजना?

फिजी बंदरगाह परियोजना एक संयुक्त बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) और समुद्री पहल है। इसके तहत क्वॉड के चारों देश मिलकर फिजी में एक उच्च क्षमता वाला बंदरगाह बनाएंगे और उसका आधुनिकीकरण करेंगे। प्रशांत महासागर में स्थित फिजी प्रमुख समुद्री मार्गों पर काफी महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थिति रखता है। इस परियोजना के जरिए क्वॉड का उद्देश्य कनेक्टिविटी को मजबूत करना, समुद्री लॉजिस्टिक्स में सुधार करना और प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति का विस्तार करना है। इस परियोजना से व्यापार पहुंच में सुधार होने और प्रशांत द्वीप देशों को चीन द्वारा वित्तपोषित (फंडेड) बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का एक बेहतर विकल्प मिलने की भी उम्मीद है।

यह परियोजना भू-राजनीतिक रूप से क्यों जरूरी है?

पिछले कई सालों से चीन अपनी ‘बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव’ (BRI) के तहत बुनियादी ढांचे में निवेश, ऋण (लोन) और बंदरगाह परियोजनाओं के जरिए पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा है। बीजिंग के आलोचकों ने बार-बार चीन पर छोटे देशों पर रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए ‘ऋण जाल कूटनीति’ (डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी) का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। ऐसे में फिजी में एक मजबूत उपस्थिति स्थापित करके क्वॉड देश इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को संतुलित करने का प्रयास कर रहे हैं।

समुद्री सुरक्षा का एक प्रमुख केंद्र बिंदु

प्रस्तावित बंदरगाह सिर्फ एक वाणिज्यिक (कमर्शियल) बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है। इस पहल से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेगी। इसमें शामिल देश अवैध रूप से मछली पकड़ने, तस्करी के नेटवर्क और संदिग्ध नौसैनिक गतिविधि की काफी प्रभावी ढंग से निगरानी कर सकेंगे। इसके अलावा, यह बंदरगाह मानवीय अभियान, आपदा राहत मिशन और समुद्री सुरक्षा गश्त के दौरान क्वॉड देशों की नौसेना के बीच लॉजिस्टिक्स समन्वय को भी बढ़ा सकता है।

भारत के लिए क्यों है यह प्रोजेक्ट जरूरी?

भारत के लिए फिजी का रणनीतिक और सांस्कृतिक दोनों ही तरह से काफी बड़ा महत्व है। अक्सर प्रशांत क्षेत्र के ‘मिनी इंडिया’ के रूप में पहचाने जाने वाले फिजी में भारतीय मूल के लोगों की एक बहुत बड़ी आबादी रहती है। इनके पूर्वज औपनिवेशिक काल के दौरान अनुबंधित मजदूरों के रूप में यहाँ आए थे। इसके साथ ही, हिंदी को भी फिजी की आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है। भारत के लिए फिजी के साथ मजबूत संबंध प्रशांत क्षेत्र में उसके राजनयिक और नौसैनिक प्रभाव का विस्तार करने में मदद करते हैं, जिससे ग्लोबल साउथ की एक प्रमुख आवाज के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूती मिलती है।

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